श्री योगीजी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

भजन-कीर्तन, सत्संग और साधकों के अनुभवों के बीच धूमधाम से मनाई गई प्रथम एकादशी

लखनऊ। श्री योगीजी मंदिर में प्रथम एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं, बुजुर्गों, साधकों एवं भक्तों ने आयोजन में सहभागिता की। भजन-कीर्तन, सत्संग, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक संदेशों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

प्रथम एकादशी के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, समाज में शांति तथा सभी के कल्याण की कामना की। सामूहिक भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे नजर आए। भक्तिगीतों और कीर्तन से मंदिर परिसर देर तक गूंजता रहा।

तप, सेवा और सुमिरन जीवन को देते हैं नई दिशा : ए. के. शुक्ल

आयोजन में आयोजित विशेष सत्संग में परमपूज्य ए. के. शुक्ल जी ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एवं धार्मिक संदेश देते हुए तप, सेवा और सुमिरन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि तप व्यक्ति को आत्मसंयम और अनुशासन की ओर ले जाता है, सेवा मानवता एवं परोपकार की भावना को मजबूत करती है और सुमिरन व्यक्ति को अपने भीतर की आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है। इन तीनों मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आध्यात्मिक जीवन केवल पूजा-पाठ अथवा धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके संस्कार और सिद्धांत व्यक्ति के व्यवहार में भी दिखाई देने चाहिए।

श्री रामचरितमानस के गूढ़ आध्यात्मिक संदेशों पर हुई चर्चा

सत्संग के दौरान ए. के. शुक्ल  ने श्री रामचरितमानस के गूढ़ रहस्यों एवं आध्यात्मिक संदेशों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मानस में निहित मर्यादा, सत्य, प्रेम, सेवा, त्याग, सदाचार और कर्तव्य जैसे जीवन-मूल्यों को सरल एवं प्रेरक ढंग से श्रद्धालुओं के सामने रखा।

उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों का वास्तविक उद्देश्य केवल उनका श्रवण करना नहीं, बल्कि उनमें निहित जीवन-दर्शन को व्यवहार में उतारना है। जब व्यक्ति सत्य, प्रेम, सेवा, सद्भाव और संस्कारों को अपने जीवन में अपनाता है, तभी आध्यात्मिक ज्ञान का वास्तविक लाभ समाज तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। परिवार में अच्छे संस्कार और समाज में सेवा एवं सद्भाव की भावना ही स्वस्थ और मजबूत समाज की आधारशिला बन सकती है।

साधकों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण योगीजी के सिद्धांतों और आदर्शों पर चलने वाले साधकों द्वारा अपने अनुभव साझा करना रहा। साधकों ने बताया कि सेवा, साधना, सुमिरन, सदाचार और अनुशासित जीवन के सिद्धांतों को अपनाने से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला।

उन्होंने योगीजी के विचारों और जीवन-मूल्यों से मिले मार्गदर्शन के अपने अनुभव श्रद्धालुओं के साथ साझा किए। साधकों ने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग व्यक्ति को केवल स्वयं के उत्थान की दिशा नहीं देता, बल्कि समाज एवं मानवता के लिए कुछ करने की प्रेरणा भी देता है।

अनुभव साझा करने के दौरान साधकों ने योगीजी के संदेशों को समाज और विशेष रूप से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्रद्धालुओं ने उनके अनुभवों को काफी ध्यानपूर्वक सुना।

भजन-कीर्तन ने बांधा समां

आयोजन में भजन-कीर्तन का विशेष कार्यक्रम भी हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भजन गाए और आध्यात्मिक वातावरण में सहभागिता की। भक्ति संगीत के दौरान महिला श्रद्धालुओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली।

मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच आपसी प्रेम, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण दिखाई दिया। पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने एकादशी के धार्मिक महत्व को आत्मसात किया।

विद्या सचान ने किया कार्यक्रम का प्रभावी संचालन

कार्यक्रम का संचालन विद्या सचान ने किया। उन्होंने भजन-कीर्तन, सत्संग एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का क्रमबद्ध एवं प्रभावी संचालन करते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित बनाए रखा। उनके संचालन में कार्यक्रम विभिन्न चरणों में सहज एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता रही। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने सामूहिक रूप से धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया और प्रथम एकादशी के पावन अवसर को आध्यात्मिक वातावरण में मनाया।

सेवा, साधना और संस्कारों का संदेश

श्री योगीजी मंदिर में आयोजित प्रथम एकादशी का यह कार्यक्रम धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सेवा, साधना, सुमिरन, सदाचार और संस्कारों के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बना।

कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिकता का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना और उस सकारात्मकता को परिवार, समाज तथा मानवता के हित में उपयोग करना है।

श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने तथा योगीजी के सेवा एवं संस्कारों के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।

अपील

श्री योगीजी मंदिर में प्रथम एकादशी के अवसर पर आयोजित सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु।

भजन-कीर्तन में आध्यात्मिक भाव से सहभागी श्रद्धालु।

प्रथम एकादशी के अवसर पर भजन-कीर्तन एवं सत्संग में शामिल साधक एवं श्रद्धालु।

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योगीजी के तप,सेवा, साधना, सुमिरन एवं संस्कारों के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। प्रेम, सेवा, एकता और सद्भाव के माध्यम से परिवार को मजबूत, समाज को संस्कारित और राष्ट्र को सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।

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